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Wednesday, 11 May 2016

तय मान लीजिए - घनाक्षरी छंद

Love Shayari
Pic Courtesy- Google

काली काली राते जब खाली खाली लागे जागे
                                     नींद का  हुआ व्यापार  तय  मान लीजिए।
बिन   बात  हंसने जो   लग  जाओ  दिन  रात
                                      प्रेम के   हुए  बीमार   तय  मान  लीजिए।
देख   के  प्रिय  का भाल, लाल लाल होय गाल
                                        प्रेम  का चढा  खुमार   तय  मान  लीजिए।
अंग  में  उमंग  का   जो    रंग  चढ  जाए   तब
                                          हो  गया  तुम्हें  भी प्यार तय मान लीजिए।
                                                                     
                                                                     - राम लखारा विपुल

Monday, 18 April 2016

कैसा अरे! श्रृंगार है

Love poems shayari
चित्र साभार -behance.net

जुल्फ के साये में हम 
              खो न जाए डर है यह
अधर अंकित तिल है 
                    मेरी थकन का घर है यह
सादगी है देह की 
                 जो रूप का सिरमौर है
सुन्दरी सुलोचना जिस-
               की ना उपमा और है
और मिलन होगा कहां 
                     अधर स्वंय अभिसार है
कैसा अरे! श्रृंगार है !
                     

                                                - राम लखारा विपुल

Friday, 8 April 2016

हिन्दू नववर्ष 2073 की शुभकामनाएं

आज ईस्वी सन् का 8 अप्रैल है, वहीं एक साधारण सी तारीख। अप्रैल का आठवां दिन जो कल 9 हो जाएगा। लेकिन विक्रमी संवत् में आज एक खास तारीख है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 2073। जी हां इसी दिन को हिन्दू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से नया वर्ष लगता है, और इस नव वर्ष का उत्सव केवल मानव नहीं बल्कि पूरा जगत मनाता है। कैसे? इस समय प्रकृति अपनी बांसती चुनर को ओढ रही होती है, जलवायु न गर्म होती है न शीत। पूरे भारतवर्ष में इसी दिन को हिन्दू नववर्ष, नवरात्रि प्रारंभ, चेटीचंड, गुड़ी पर्व अलग अलग रूप में मनाया जाता है। आप सभी मेरे प्रिय पाठकों को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की अनेकानेक शुभकामनाएं, आज के लिए मेरी एक छोटी कविता भी आपकों प्रस्तुत है-

यह साल नया कुछ ऐसा कर दे, जीवन में नित मौज रहे
खुशियों से झोली सबकी भरे , उमंग नवेली रोज रहे
हर रोज रहे पक्षी को पानी, रोज भूख को अन्न मिले
रोज ईद संग दीप जले और रोज होली के रंग मिले
मिले मानवता सजी धजी और बेटी का भी मान रहे
खेतीहरों की पीर मिटे और भारत भू जय गान रहे। 
                                                    - राम लखारा विपुल



Hindu New year Vikrami samwat Shayari

Tuesday, 23 February 2016

नज्म Hindi Shayari

बहुत दिनों बाद आपके लिए पेश है अपनी नज्म के दो कता़ । मेरी रचना आपको कैसी लगी अपनी टिप्पणी के माध्यम से जरूर बताए-

Hindi Shayari

Tuesday, 29 December 2015

प्रकाशित - कविता

पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर में संपादक श्री अनिल अनवर के संपादन में प्रकाशित हो रही साहित्यिक पत्रिका मरू गुलशन में प्रकाशित एक कविता -


Hindi Poem
Ram Lakhara Vipul Published Poem

Monday, 7 December 2015

गीत - मैं बाती बन

 मैं बाती बन जलूं रात भर- 


Ram Lakhara Vipul Poem and Lyrics

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