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Sunday, 15 May 2016

Shayari for Talee (ताली शायरी) - 3

अक्सर Stage Anchoring, मंच संचालन या कोई कार्यक्रम में हमें ऐसी पंक्तियों अथवा शायरियों की आवश्यकता पड़ती है जिनमें तालियों की फरमाइश की जाती है। पिछले दिनों ऐसी दो शायरियां लिख पाया जो मैं इस ब्लाॅग पर अपने पाठकों के रसास्वादन हेतु प्रकाशित कर रहा हूूं-

बनों ऐसे महायोद्धा   न जाए वार इक खाली
मुख से बोल प्यारे हो, न हो कोई गलत गाली
आंखे हो जिनसे सबके सद्गुण ही नजर आए
उठे तारीफ हेतु हाथ बजे ताली पे फिर ताली। - विपुल

भक्ति के भाव में रत मन भजन को छू लेता है
प्रेम के वश पतंगा लौ की अगन को छू लेता है
मिले साहस किसी को तारीफ की तालियों से तो
जमी से उठ के पत्थर भी गगन को छू लेता है। - विपुल

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Friday, 8 April 2016

हिन्दू नववर्ष 2073 की शुभकामनाएं

आज ईस्वी सन् का 8 अप्रैल है, वहीं एक साधारण सी तारीख। अप्रैल का आठवां दिन जो कल 9 हो जाएगा। लेकिन विक्रमी संवत् में आज एक खास तारीख है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 2073। जी हां इसी दिन को हिन्दू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से नया वर्ष लगता है, और इस नव वर्ष का उत्सव केवल मानव नहीं बल्कि पूरा जगत मनाता है। कैसे? इस समय प्रकृति अपनी बांसती चुनर को ओढ रही होती है, जलवायु न गर्म होती है न शीत। पूरे भारतवर्ष में इसी दिन को हिन्दू नववर्ष, नवरात्रि प्रारंभ, चेटीचंड, गुड़ी पर्व अलग अलग रूप में मनाया जाता है। आप सभी मेरे प्रिय पाठकों को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की अनेकानेक शुभकामनाएं, आज के लिए मेरी एक छोटी कविता भी आपकों प्रस्तुत है-

यह साल नया कुछ ऐसा कर दे, जीवन में नित मौज रहे
खुशियों से झोली सबकी भरे , उमंग नवेली रोज रहे
हर रोज रहे पक्षी को पानी, रोज भूख को अन्न मिले
रोज ईद संग दीप जले और रोज होली के रंग मिले
मिले मानवता सजी धजी और बेटी का भी मान रहे
खेतीहरों की पीर मिटे और भारत भू जय गान रहे। 
                                                    - राम लखारा विपुल



Hindu New year Vikrami samwat Shayari

Tuesday, 8 March 2016

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

आज 8 मार्च है अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, साल का वह एकमात्र दिन जब सभी लोग महिलाओं के उत्थान की बात करते है। उसे पुरूष की सामंतवादी प्रभुत्वपूर्ण सोच से उबारने के तरीके सुझाते है और उसकी पैरोकारी करते है। हम सब जीवन के हर मोड़ पर हर पड़ाव पर कहीं न कही, किसी न किसी औरत से जुड़ाव में रहते है। चाहे वह मां हो, महबूबा हो, पत्नी हो या चाहे बेटी हो। हमारा उनसे जुड़ाव महज इसलिए नहीं होता कि प्रकृति ने हमें इसके लिए बाध्य किया है, बल्कि इसलिए भी कि हमें पग पग पर एक मजबूत हाथ की आवश्यकता होती है और कहना न होगा कि औरत की सहनशीलता, दृढता, स्नेह, सोच और सूझबूझ सबसे अलग है, विलक्षण है। औरत किसी पंगत का भोज नहीं है जिसे भाया जितना खाया और झूठा छोड़ दिया, वह पूजा की थाली का वह योग्य फूल है जो देवता को सबसे पहले समर्पित किया जाता है। हम सब इतना प्रण भी कर ले कि जो नारी हमसे जीवन में जुड़ी हुई है उसका सम्मान करेंगे और उसे समझने का प्रयत्न करंेगे तो हमारे हिस्से का महिला दिवस हम ईमानदारी से मना रहें होंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉ उर्मिलेश का एक दोहा याद आता है-

तितली,हिरणी,मोरनी,कोयल,बत्तख,मीन।
सृष्टि पिता की बेटियां कितनी शोख हसीन।।

Ram Lakhara Vipul Poetry

Monday, 7 March 2016

महाशिवरात्रि पर्व

अनन्त में गूंजते स्वर का नाम है शिव। शिव वहीं जो सुंदर है, कल्याण मय और सत्य है। शिव वही जो विष पीता है। शिव वही जो जिसके सानिध्य में शत्रु भी मित्र हो जाते है, जैसे शिव के परिवार में चूहा, सर्प, मोर, सिंह परस्पर शत्रु होते हुए भी प्रेम भाव से साथ रहते है। देव बनना सरल है महादेव बनना दुष्कर, महादेव बनने के लिए जहर पीना पड़ता है और अमृत लुटाना पड़ता है। निर्माण और निर्वाण जिसके इशारों पर काम करते है वह शिव है। आज महाशिवरात्रि का पर्व आप सभी पाठकों और सुधिजनों के लिए मंगलकारी और शुभ हो। ऐसी मेरी शुभकामना है। आपके हृदय में शिव गूंजते रहे, बसते रहे और हंसते रहे।

Lord shiva images poetry

Thursday, 31 December 2015

नए साल का स्वागत (Happy New Year 2016)

दोस्तों साल जाने को है। आज 31 दिसबंर हो गई है। 2015 हमारे पास से आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाएगा, और हमें 2016 की गोद में सौंप जाएगा। 2016 की अंगुली पकड़कर हमें फिर से 365 पग भरने है। साल बीता, हाल बीता। जो कुछ पाया, उससे कहीं अधिक पाने की ख्वाहिश के साथ नए साल का स्वागत किया जाए। जो साथी पग पग पर साथ है, आगे भी साथ रहे और जो जीवन की आपाधापी में कच्ची, पक्की कीमतों पर साथ छोड़ गए, वें हर हाल में खुश रहे।जो साथी इस साल बिछड़ गए, भगवान उन्हें फिर किसी नए जन्म में हमसे मिलवा दे। नया साल, नई उम्मीदे लेकर आता है। व्यक्तिगत रूप से हम सब नए साल की शुरूआत में कुछ नया करने की ठानते है। चूुकि अब मानवता अपने चरम पर है, इसिलिए उसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमें सामूहिक रूप से भी कुछ नया करने की ठाननी होगी। हम सब संकल्प करे कि फिर से कोई निर्भया अपनी बदहाली पर आंसू बहाते हुए दम नहीं तोड़ेगी, फिर से किसी औरत को तेजाब का दंश न झेलना पड़े, फिर से किसी फौजी की बेटी हमसे यह सवाल न पूछे कि फौजी का परिवार ही क्यों रोता है?, फिर से हमे न्याय न दिलवा पाने के कारण वंचितों से आंख न चुरानी पड़े, ऐसे समाज की दिशा में हम बढ सकते है जहां सुरक्षा हो तो साामूहिक, खुशी हो तो सामूहिक रूप से और किसी का गम हो तो भी हम सामूहिक रूप से साथ हो। 121 करोड़ का देश है, लेकिन हम स्वंय में ब्रह्मा है- अहं ब्रह्मास्मि। हम खुद को बदले, और देखिए धीरे धीरे पूरा समाज बदलता हुआ दिखेगा। व्यक्तिगत रूप से भी हम ऐसे प्रयास करे जिससे हमें खुशी मिले, हमारा कदम आगे बढें, हम स्वस्थ रहे और सुरक्षित रहे। मेरा विजन स्पष्ट है- 2016 में मैं अपनी दो पुस्तके प्रकाशित करवाने जा रहा हूं, साथ ही ज्यादा से ज्यादा अध्ययन पर मेरा जोर रहेगा। आप सब को नए साल की अशेष हार्दिक शुभकामनाएं। यह ब्लाॅग इस साल के अंत तक अपने 12000 पेज व्यूज तक पहुंच गया है, नए साल में और ज्यादा पाठक इससे जुड़े, ऐसी मुझे आशा है।

आंसू हंसी की धार में खो जाए तो क्या बात है ,
जिसे चाहा टूटके हमने वो आए तो क्या बात है ,
थाम कर  हाथ में हाथ चले फिर से कुछ कदम ,
नए साल में ऐसा कुछ हो जाए तो क्या बात है। - राम लखारा 'विपुल'



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