Showing posts with label छंद (Chhand). Show all posts
Showing posts with label छंद (Chhand). Show all posts

Wednesday, 8 June 2016

एक मुक्तक - Shayari

हाथों    मेहंदी,  होठो    लाली,  पैरो   पर    महावर   है
बिंदी,  काजल,  आंखे,  जुल्फे  सबके सब हमलावर है
कहने की यह बात नहीं कि समझाना भी मुश्किल कि
ऐसे  दिलकश हमलों  पर तो जान  प्रिये न्यौछावर है।
                                                                     -  विपुल


Hindi Poems

Wednesday, 11 May 2016

तय मान लीजिए - घनाक्षरी छंद

Love Shayari
Pic Courtesy- Google

काली काली राते जब खाली खाली लागे जागे
                                     नींद का  हुआ व्यापार  तय  मान लीजिए।
बिन   बात  हंसने जो   लग  जाओ  दिन  रात
                                      प्रेम के   हुए  बीमार   तय  मान  लीजिए।
देख   के  प्रिय  का भाल, लाल लाल होय गाल
                                        प्रेम  का चढा  खुमार   तय  मान  लीजिए।
अंग  में  उमंग  का   जो    रंग  चढ  जाए   तब
                                          हो  गया  तुम्हें  भी प्यार तय मान लीजिए।
                                                                     
                                                                     - राम लखारा विपुल

Tuesday, 8 March 2016

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

आज 8 मार्च है अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, साल का वह एकमात्र दिन जब सभी लोग महिलाओं के उत्थान की बात करते है। उसे पुरूष की सामंतवादी प्रभुत्वपूर्ण सोच से उबारने के तरीके सुझाते है और उसकी पैरोकारी करते है। हम सब जीवन के हर मोड़ पर हर पड़ाव पर कहीं न कही, किसी न किसी औरत से जुड़ाव में रहते है। चाहे वह मां हो, महबूबा हो, पत्नी हो या चाहे बेटी हो। हमारा उनसे जुड़ाव महज इसलिए नहीं होता कि प्रकृति ने हमें इसके लिए बाध्य किया है, बल्कि इसलिए भी कि हमें पग पग पर एक मजबूत हाथ की आवश्यकता होती है और कहना न होगा कि औरत की सहनशीलता, दृढता, स्नेह, सोच और सूझबूझ सबसे अलग है, विलक्षण है। औरत किसी पंगत का भोज नहीं है जिसे भाया जितना खाया और झूठा छोड़ दिया, वह पूजा की थाली का वह योग्य फूल है जो देवता को सबसे पहले समर्पित किया जाता है। हम सब इतना प्रण भी कर ले कि जो नारी हमसे जीवन में जुड़ी हुई है उसका सम्मान करेंगे और उसे समझने का प्रयत्न करंेगे तो हमारे हिस्से का महिला दिवस हम ईमानदारी से मना रहें होंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉ उर्मिलेश का एक दोहा याद आता है-

तितली,हिरणी,मोरनी,कोयल,बत्तख,मीन।
सृष्टि पिता की बेटियां कितनी शोख हसीन।।

Ram Lakhara Vipul Poetry

Monday, 7 March 2016

महाशिवरात्रि पर्व

अनन्त में गूंजते स्वर का नाम है शिव। शिव वहीं जो सुंदर है, कल्याण मय और सत्य है। शिव वही जो विष पीता है। शिव वही जो जिसके सानिध्य में शत्रु भी मित्र हो जाते है, जैसे शिव के परिवार में चूहा, सर्प, मोर, सिंह परस्पर शत्रु होते हुए भी प्रेम भाव से साथ रहते है। देव बनना सरल है महादेव बनना दुष्कर, महादेव बनने के लिए जहर पीना पड़ता है और अमृत लुटाना पड़ता है। निर्माण और निर्वाण जिसके इशारों पर काम करते है वह शिव है। आज महाशिवरात्रि का पर्व आप सभी पाठकों और सुधिजनों के लिए मंगलकारी और शुभ हो। ऐसी मेरी शुभकामना है। आपके हृदय में शिव गूंजते रहे, बसते रहे और हंसते रहे।

Lord shiva images poetry

Tuesday, 23 February 2016

मुक्तक हिंदी शायरी Hindi Shayari

शायरी और प्रेम के दीवानों के लिए एक प्यार भरा मुक्तक- 

Hindi Shayari Love

नज्म Hindi Shayari

बहुत दिनों बाद आपके लिए पेश है अपनी नज्म के दो कता़ । मेरी रचना आपको कैसी लगी अपनी टिप्पणी के माध्यम से जरूर बताए-

Hindi Shayari

Wednesday, 13 January 2016

परहित Hindi Poem

परहित


रात गगन में तारे  अगणित,
जड़वत  हो  अनजान  खड़े है,
छोटे  छोटे   दिखे   भले    पर
मन ही मन अभिमान बड़े है।

ऐसे  में   इन  सबका  अब  तो
सबक  सीखना     निश्चित  है
परहित   पाठ    पढा़ने        को
 सूरज   निकलना   निश्चित है।


- राम लखारा 'विपुल'

Wednesday, 16 December 2015

दोहे (Hindi Dohe)

Ram Lakhara Vipul Poetry
अस्ताचल के सूर्य से, सब लेते मुंह फेर।
अपनों की या गैर की, परख करे अंधेर।।
- राम लखारा

वाणी का सब खेल है, अमरित औ विष दोय।
एक गैर अपना करै, दूजे दूरी होय।।
- राम लखारा

join us on facebook...