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Thursday, 30 June 2016

समाज को समर्पित तीन मुक्तक

Hindi Poems


सौंपकर ज्योति प्रण की आओं मिलकर तम हटाए
साथ बैठे साथ गाए साथ मिलकर गम बटांए
समाज के विकास की बस इतनी सी है बात भर
एक कदम आप बढाओं एक कदम हम बढाए।
- कवि राम लखारा 'विपुल'


काल का विकराल पहिया हिम्मत से चलाना होगा
समाज के इस बाग को मेहनत से फलाना होगा
दिन दूनी और रात चैगुनी गति से गर बढ़ना है
मिलकर के हर घर में ज्ञान का दीप जलाना होगा।
- कवि राम लखारा 'विपुल'

मिल जुल कर हम खुशियों का नया जहान बना ले आओं
प्रेम स्नेह और दया भाव से नव खलिहान बना ले आओं
आओं मिलकर गले लगे और शिकवें सारे भूल जाए
भूल पुरानी बातें हम नया हिंदुस्तान बना ले आओं।
- कवि राम लखारा 'विपुल'

Wednesday, 8 June 2016

एक मुक्तक - Shayari

हाथों    मेहंदी,  होठो    लाली,  पैरो   पर    महावर   है
बिंदी,  काजल,  आंखे,  जुल्फे  सबके सब हमलावर है
कहने की यह बात नहीं कि समझाना भी मुश्किल कि
ऐसे  दिलकश हमलों  पर तो जान  प्रिये न्यौछावर है।
                                                                     -  विपुल


Hindi Poems

Sunday, 15 May 2016

Shayari for Talee (ताली शायरी) - 3

अक्सर Stage Anchoring, मंच संचालन या कोई कार्यक्रम में हमें ऐसी पंक्तियों अथवा शायरियों की आवश्यकता पड़ती है जिनमें तालियों की फरमाइश की जाती है। पिछले दिनों ऐसी दो शायरियां लिख पाया जो मैं इस ब्लाॅग पर अपने पाठकों के रसास्वादन हेतु प्रकाशित कर रहा हूूं-

बनों ऐसे महायोद्धा   न जाए वार इक खाली
मुख से बोल प्यारे हो, न हो कोई गलत गाली
आंखे हो जिनसे सबके सद्गुण ही नजर आए
उठे तारीफ हेतु हाथ बजे ताली पे फिर ताली। - विपुल

भक्ति के भाव में रत मन भजन को छू लेता है
प्रेम के वश पतंगा लौ की अगन को छू लेता है
मिले साहस किसी को तारीफ की तालियों से तो
जमी से उठ के पत्थर भी गगन को छू लेता है। - विपुल

Read More Talee Shayari ताली शायरी

Part 1 Click Here

Part 2 Click Here


Wednesday, 11 May 2016

तय मान लीजिए - घनाक्षरी छंद

Love Shayari
Pic Courtesy- Google

काली काली राते जब खाली खाली लागे जागे
                                     नींद का  हुआ व्यापार  तय  मान लीजिए।
बिन   बात  हंसने जो   लग  जाओ  दिन  रात
                                      प्रेम के   हुए  बीमार   तय  मान  लीजिए।
देख   के  प्रिय  का भाल, लाल लाल होय गाल
                                        प्रेम  का चढा  खुमार   तय  मान  लीजिए।
अंग  में  उमंग  का   जो    रंग  चढ  जाए   तब
                                          हो  गया  तुम्हें  भी प्यार तय मान लीजिए।
                                                                     
                                                                     - राम लखारा विपुल

Monday, 18 April 2016

कैसा अरे! श्रृंगार है

Love poems shayari
चित्र साभार -behance.net

जुल्फ के साये में हम 
              खो न जाए डर है यह
अधर अंकित तिल है 
                    मेरी थकन का घर है यह
सादगी है देह की 
                 जो रूप का सिरमौर है
सुन्दरी सुलोचना जिस-
               की ना उपमा और है
और मिलन होगा कहां 
                     अधर स्वंय अभिसार है
कैसा अरे! श्रृंगार है !
                     

                                                - राम लखारा विपुल

Tuesday, 23 February 2016

मुक्तक हिंदी शायरी Hindi Shayari

शायरी और प्रेम के दीवानों के लिए एक प्यार भरा मुक्तक- 

Hindi Shayari Love

नज्म Hindi Shayari

बहुत दिनों बाद आपके लिए पेश है अपनी नज्म के दो कता़ । मेरी रचना आपको कैसी लगी अपनी टिप्पणी के माध्यम से जरूर बताए-

Hindi Shayari

Thursday, 31 December 2015

नए साल का स्वागत (Happy New Year 2016)

दोस्तों साल जाने को है। आज 31 दिसबंर हो गई है। 2015 हमारे पास से आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाएगा, और हमें 2016 की गोद में सौंप जाएगा। 2016 की अंगुली पकड़कर हमें फिर से 365 पग भरने है। साल बीता, हाल बीता। जो कुछ पाया, उससे कहीं अधिक पाने की ख्वाहिश के साथ नए साल का स्वागत किया जाए। जो साथी पग पग पर साथ है, आगे भी साथ रहे और जो जीवन की आपाधापी में कच्ची, पक्की कीमतों पर साथ छोड़ गए, वें हर हाल में खुश रहे।जो साथी इस साल बिछड़ गए, भगवान उन्हें फिर किसी नए जन्म में हमसे मिलवा दे। नया साल, नई उम्मीदे लेकर आता है। व्यक्तिगत रूप से हम सब नए साल की शुरूआत में कुछ नया करने की ठानते है। चूुकि अब मानवता अपने चरम पर है, इसिलिए उसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमें सामूहिक रूप से भी कुछ नया करने की ठाननी होगी। हम सब संकल्प करे कि फिर से कोई निर्भया अपनी बदहाली पर आंसू बहाते हुए दम नहीं तोड़ेगी, फिर से किसी औरत को तेजाब का दंश न झेलना पड़े, फिर से किसी फौजी की बेटी हमसे यह सवाल न पूछे कि फौजी का परिवार ही क्यों रोता है?, फिर से हमे न्याय न दिलवा पाने के कारण वंचितों से आंख न चुरानी पड़े, ऐसे समाज की दिशा में हम बढ सकते है जहां सुरक्षा हो तो साामूहिक, खुशी हो तो सामूहिक रूप से और किसी का गम हो तो भी हम सामूहिक रूप से साथ हो। 121 करोड़ का देश है, लेकिन हम स्वंय में ब्रह्मा है- अहं ब्रह्मास्मि। हम खुद को बदले, और देखिए धीरे धीरे पूरा समाज बदलता हुआ दिखेगा। व्यक्तिगत रूप से भी हम ऐसे प्रयास करे जिससे हमें खुशी मिले, हमारा कदम आगे बढें, हम स्वस्थ रहे और सुरक्षित रहे। मेरा विजन स्पष्ट है- 2016 में मैं अपनी दो पुस्तके प्रकाशित करवाने जा रहा हूं, साथ ही ज्यादा से ज्यादा अध्ययन पर मेरा जोर रहेगा। आप सब को नए साल की अशेष हार्दिक शुभकामनाएं। यह ब्लाॅग इस साल के अंत तक अपने 12000 पेज व्यूज तक पहुंच गया है, नए साल में और ज्यादा पाठक इससे जुड़े, ऐसी मुझे आशा है।

आंसू हंसी की धार में खो जाए तो क्या बात है ,
जिसे चाहा टूटके हमने वो आए तो क्या बात है ,
थाम कर  हाथ में हाथ चले फिर से कुछ कदम ,
नए साल में ऐसा कुछ हो जाए तो क्या बात है। - राम लखारा 'विपुल'



Saturday, 3 January 2015

श्रृंगार रस मुक्तक

Ram Lakhara poetry
 जो तुझसे प्यार है मेरा वो बहुतो को चुभता है ,
जैसे सुर्ख गुलाबी फूल संग काँटों के उगता है ,
जातां कितने भी कर ले वो मगर मालूम नहीं उनको
मैं तो वो मुसाफिर हु जो बस मंजिल पर रुकता है।
-राम लखारा

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