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Wednesday, 7 December 2016

'जैसलमेर के नाम पाती' कविता

दिांक 04 दिसबंर 2016 को बीकानेर से प्रकाशित दैनिक अखबार दैनिक युगपक्ष में प्रकाशित कविता-



Wednesday, 8 June 2016

एक मुक्तक - Shayari

हाथों    मेहंदी,  होठो    लाली,  पैरो   पर    महावर   है
बिंदी,  काजल,  आंखे,  जुल्फे  सबके सब हमलावर है
कहने की यह बात नहीं कि समझाना भी मुश्किल कि
ऐसे  दिलकश हमलों  पर तो जान  प्रिये न्यौछावर है।
                                                                     -  विपुल


Hindi Poems

Friday, 8 April 2016

हिन्दू नववर्ष 2073 की शुभकामनाएं

आज ईस्वी सन् का 8 अप्रैल है, वहीं एक साधारण सी तारीख। अप्रैल का आठवां दिन जो कल 9 हो जाएगा। लेकिन विक्रमी संवत् में आज एक खास तारीख है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 2073। जी हां इसी दिन को हिन्दू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से नया वर्ष लगता है, और इस नव वर्ष का उत्सव केवल मानव नहीं बल्कि पूरा जगत मनाता है। कैसे? इस समय प्रकृति अपनी बांसती चुनर को ओढ रही होती है, जलवायु न गर्म होती है न शीत। पूरे भारतवर्ष में इसी दिन को हिन्दू नववर्ष, नवरात्रि प्रारंभ, चेटीचंड, गुड़ी पर्व अलग अलग रूप में मनाया जाता है। आप सभी मेरे प्रिय पाठकों को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की अनेकानेक शुभकामनाएं, आज के लिए मेरी एक छोटी कविता भी आपकों प्रस्तुत है-

यह साल नया कुछ ऐसा कर दे, जीवन में नित मौज रहे
खुशियों से झोली सबकी भरे , उमंग नवेली रोज रहे
हर रोज रहे पक्षी को पानी, रोज भूख को अन्न मिले
रोज ईद संग दीप जले और रोज होली के रंग मिले
मिले मानवता सजी धजी और बेटी का भी मान रहे
खेतीहरों की पीर मिटे और भारत भू जय गान रहे। 
                                                    - राम लखारा विपुल



Hindu New year Vikrami samwat Shayari

Tuesday, 8 March 2016

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

आज 8 मार्च है अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, साल का वह एकमात्र दिन जब सभी लोग महिलाओं के उत्थान की बात करते है। उसे पुरूष की सामंतवादी प्रभुत्वपूर्ण सोच से उबारने के तरीके सुझाते है और उसकी पैरोकारी करते है। हम सब जीवन के हर मोड़ पर हर पड़ाव पर कहीं न कही, किसी न किसी औरत से जुड़ाव में रहते है। चाहे वह मां हो, महबूबा हो, पत्नी हो या चाहे बेटी हो। हमारा उनसे जुड़ाव महज इसलिए नहीं होता कि प्रकृति ने हमें इसके लिए बाध्य किया है, बल्कि इसलिए भी कि हमें पग पग पर एक मजबूत हाथ की आवश्यकता होती है और कहना न होगा कि औरत की सहनशीलता, दृढता, स्नेह, सोच और सूझबूझ सबसे अलग है, विलक्षण है। औरत किसी पंगत का भोज नहीं है जिसे भाया जितना खाया और झूठा छोड़ दिया, वह पूजा की थाली का वह योग्य फूल है जो देवता को सबसे पहले समर्पित किया जाता है। हम सब इतना प्रण भी कर ले कि जो नारी हमसे जीवन में जुड़ी हुई है उसका सम्मान करेंगे और उसे समझने का प्रयत्न करंेगे तो हमारे हिस्से का महिला दिवस हम ईमानदारी से मना रहें होंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉ उर्मिलेश का एक दोहा याद आता है-

तितली,हिरणी,मोरनी,कोयल,बत्तख,मीन।
सृष्टि पिता की बेटियां कितनी शोख हसीन।।

Ram Lakhara Vipul Poetry

Monday, 7 March 2016

महाशिवरात्रि पर्व

अनन्त में गूंजते स्वर का नाम है शिव। शिव वहीं जो सुंदर है, कल्याण मय और सत्य है। शिव वही जो विष पीता है। शिव वही जो जिसके सानिध्य में शत्रु भी मित्र हो जाते है, जैसे शिव के परिवार में चूहा, सर्प, मोर, सिंह परस्पर शत्रु होते हुए भी प्रेम भाव से साथ रहते है। देव बनना सरल है महादेव बनना दुष्कर, महादेव बनने के लिए जहर पीना पड़ता है और अमृत लुटाना पड़ता है। निर्माण और निर्वाण जिसके इशारों पर काम करते है वह शिव है। आज महाशिवरात्रि का पर्व आप सभी पाठकों और सुधिजनों के लिए मंगलकारी और शुभ हो। ऐसी मेरी शुभकामना है। आपके हृदय में शिव गूंजते रहे, बसते रहे और हंसते रहे।

Lord shiva images poetry

Tuesday, 23 February 2016

मुक्तक हिंदी शायरी Hindi Shayari

शायरी और प्रेम के दीवानों के लिए एक प्यार भरा मुक्तक- 

Hindi Shayari Love

नज्म Hindi Shayari

बहुत दिनों बाद आपके लिए पेश है अपनी नज्म के दो कता़ । मेरी रचना आपको कैसी लगी अपनी टिप्पणी के माध्यम से जरूर बताए-

Hindi Shayari

Saturday, 3 January 2015

श्रृंगार रस मुक्तक

Ram Lakhara poetry
 जो तुझसे प्यार है मेरा वो बहुतो को चुभता है ,
जैसे सुर्ख गुलाबी फूल संग काँटों के उगता है ,
जातां कितने भी कर ले वो मगर मालूम नहीं उनको
मैं तो वो मुसाफिर हु जो बस मंजिल पर रुकता है।
-राम लखारा

Saturday, 27 December 2014

Hindi Muktak Poetry

                      तुझे चाहना तुझे पाना, यह मेरी ज़ुस्तज़ु अब है ,
                       मेरे दीवानेपन की भी थोड़ी सी गुफ्तगू अब है ,
                         बड़ा ही शोख चेहरा है तेरा ऐ हुस्न की रानी ,
                    जिधर फेरु नज़र अपनी वही बस तू ही तू अब है।
                                           -राम लखारा

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