काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपुल' का कविता संसार
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Tuesday, 26 April 2016
नई सुबह - Poem
नई सुबह की राह में
बिछतें तारे रोज
जुगनू भी ज्योति लेकर
करते उसकी खोज
चांद भी आधा होता
कभी रहता पूरा
दिवस राजा बनने का
स्वप्न सदा अधूरा
लाख करे जोर पर
पहलें कहां मिलता है
तय समय पर ही नित्य
नया सूर्य खिलता है।
- राम लखारा विपुल
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